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फर्जी बीटीसी प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने पर तीन साल की सजा


पांच हजार रुपया अर्थदंड भी देना होगा आरोपी को

 

अल्मोड़ा। न्यायिक मजिस्ट्रेट संजीव कुमार ने फर्जी बीटीसी प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षा विभाग में नौकरी पा चुके शिक्षक विजेन्द्र कुमार पुत्र तिरमल सिंह निवासी गांव किशना रामपुर जिला बिजनौर को तीन साल की कठोर कारावास की सजा और पंाच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
आरोपी ने 22जनवरी 1992 को लमगड़ा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय स्यूड़ा में पहली तैनाती हासिल पाई थी। 2015 में शिकायतकर्ता जेनब जुहा की आरटीआई के बाद हुई जांच में बीटीसी प्रमाण प़त्र के फर्जी होने का तथ्य सामने आया था। सूचना आयोग ने भी इस प्रकरण पर जांच कराई। जांच अधिकारी ने इलाहाबाद से प्राप्त निर्देशों के तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिद्वार को रिर्पोट दी जिसके बाद विरेन्द्र कुमार के विरुद्ध बहादपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की। मामले की जंाच आरोपी के प्रथम तैनाती विद्यालय लमगड़ा क्षेत्र की पुलिस ने भी मामले का विचारण किया।
इस मामले का परिशीलन न्यायिक मजिस्ट्रेट अल्मोड़ा में किया गया। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी प्रभारी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी अरुण गौड़ ने 7 गवाह परीक्षित कराए। साथ ही अभियोजन के समर्थन में 13 दस्तावेजों को साबित कराया। फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने अभियुक्त विजेन्द्र कुमार को धारा 420 में तीन वर्ष का कठोर कारावास और तीन हजार का जुर्माना तथा धारा 471 में 2 वर्ष का कठोर कारावास और दो हजार का जुर्माने की सजा से दंडित किया। अभियुक्त को धारा 467 और 468 में संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त किया गया।

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