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वन सरंक्षक की आवभगत में लगा पूरा महकमा : आग जस की तस

अल्मोड़ा से कपिल मल्होत्रा
अल्मोड़ा। वन विभाग के जनता दरबार में प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने जनता की समस्या की सुनवाई की। जनता दरबार में वन विभाग ने बड़ी बड़ी बातें तो की लेकिन जनता दरबार में सारे अधिकारियों की अगवाई ये सवाल खड़े कर रही है कि पूरा पहाड़ आज आग की चपेट में है और जंगल आम जनता के लिए क्यों छोड़ दिया गया। जनता दरबार का क्या ये मतलब है कि उच्चाधिकारियों का आने पर सभी अधिकारी, कर्मचारी सब काम छोड़ कर क्या अधिकारी की अगवाई में आ जाते है?
 जनता दरबार में जंगलों की आग और प्रभारी वन अधिकारी पंकज कुमार की शिकायतों की झड़ी लगी रही। जनता ने कर्मचारियों की कमी के कारण होने वाली परेशानी के निदान करने की अपील की।  उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र के सभी जंगल बढ़ती जा रही गर्मी में धू धू कर जल रहे हैं। वन विभाग आग को बुझा पाने में पूरी तरह विफल हो चुका है। वहीं भीषण आग से करोड़ों की वन सम्पदा आग की भेंट चढ़ चुकी है। लाखों की संख्या में अनेक पक्षि, पशु आग की चपेट में जलकर मर चुके हैं। इतनी भयावह घटना के बाद भी शासन प्रशासन नहीं चेता है जो कि बेहद दुर्भाग्य पूर्ण है।  वहीं उत्तराखण्ड के प्रमुख वन संरक्षक जयराज अल्मोड़ा के अपने भ्रमण कार्यक्रम में हैं। अपने चीफ के आवाभगत में पूरा वन विभाग जुटा है। वन विभाग के जनपद स्तर के उच्चाधिकारी से लेकर फारेस्ट गार्ड तक पूरी मुस्तैदी  से जुटा हुआ है जबकि इस समय अगर वन विभाग के अधिकारी थोड़ी बहुत भी जनता के प्रति गम्भीर होते तो सर्वप्रथम जंगलों में लगी भीषण आग को बुझाने का प्रयास करते ,  लेकिन उक्त अधिकारी एंव कर्मचारी अपने प्रदेश के विभागीय आका को खुश करने के लिए पूरी ताकत लगाये हैं।  गौरतलब है कि जंगलों में लगी भीषण आग से पूरा पर्यावरण प्रभावित हो चुका है आग, धुएं एंव कोहरे से गम्भीर बीमारियों के फैलने की आंशका हैं।
लेकिन जिम्मेदार वनविभाग के अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगना शासन प्रशासन की कार्यशैली को प्रदर्शित करता है।  वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जनता ही आग लगाती है और जनता ही विभाग पर आरोप लगाती है। विभाग का मानना है कि उसके कर्मचारी पूरी मुस्तैदी के साथ काम करते है।
 जनता दरबार लगाने का मुख्य कारण जयराज ने पंकज कुमार की शिकायतों को ही माना है। डीएफओ पंकज कुमार के खिलाफ जनता और ठेकेदारों के साथ साथ पत्रकारों ने भी सूचना मुहैया न करने की बात कही। इस दौरान जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से  बडी़ संख्या में आये सरपंचों ने अपनी समस्या को प्रमुख के सामने रखा। विशेष तौर पर संरपंचों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गम्भीर सवाल उठाते हुए कहा कि भीषण गर्मी में वन पंचायत के प्रतिनिधि सुरक्षा के तामझामों के बगैर जंगलों की आग को बुझाने में अहम भूमिका अदा कर रहें हैं। लेकिन विभाग के नक्कारे अधिकारियों द्वारा विगत वर्ष आग बुझाने में लगाये गये मजदूरों का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।  जिससे वन पंचायत वर्तमान में जंगलों में लगी आग को बुझाने में असमर्थ है। प्रमुख वन संरक्षक द्वारा भुगतान के लिए उच्च अधिकारियों को तुरन्त निर्देश दिये गये।
नगर के अन्य संगठनों ने भी आंतक के पर्याय बन चुके कटखने बन्दरों को पकड़ने की पुरजोर मांग की।
अल्मोड़ा पहुँचे प्रमुख वन संरक्षक  के स्वागत में जिस प्रकार से अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चम्पावत के वन अधिकारियों ने विगत दिवस से स्वागत तैयारियों  के लिए रात दिन एक कर कार्यक्रम को सफल बनाया । काश, इसी प्रकार की तैयारी अगर जंगलों में लगी आग को बुझाने में की जाती तो जंगलों में आग पर काफी हद तक काबू किया जा सकता था। लेकिन प्रमुख वन संरक्षक जयराज द्वारा अपनी पत्रकार वार्ता में जंगलों में लगी आग के लिए स्थानीय जनता को ही दोषी होने का आरोप लगाना स्पष्ट करता है कि वन विभाग के नकारे अधिकारियों को बचाया जा रहा है।
इस संबंध में जनता दरबार कार्यक्रम में आये प्रदेश कांग्रेस सचिव त्रिलोचन जोशी ने कहा कि राज्य गठन के बाद से ही गर्मियों के दिनों में विभिन्न विभागों के राज्य प्रमुख ठन्डी हवा का आनंद लेने के लिए अपने सरकारी कार्यक्रम बनाकर मात्र खानापूर्ति के लिए जनता दरबार कार्यक्रम लगाते रहें हैं। आज तक जनता की बुनियादी समस्याओं को समाधान नहीं होना ऐसे अधिकारियों की अकर्मण्यता को दर्शाता हैं। प्रमुख वन संरक्षक द्वारा जंगलों में लगी भीषण आग पर  अपनी विभाग की खामियां पर पर्दा डालना प्रदेश के भविष्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
 एक पत्रकार वार्ता में प्रमुख वन संरक्षक जयराम ने कहा कि प्रदेश में वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए विभाग के पास बजट की कोई कमी नहीं है। इस बार जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए सरकार ने प्रदेश के वन पंचायतों को 2.67 करोड़ रूपये दे दिए है। इसके अलावा साढ़े तीन करोड़ रूपये रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभी तक पूरे प्रदेश में वनाग्नि से साढे बारह सौ हैक्टेयर जंगल जलने से करीब 21 लाख रूपये की नुकसान की सूचना मिली है।

वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक जयराम ने कहा कि वन विभाग आग पर काबू पाने के लिए पूरी तैयारी में है। उसने इस भीषण समस्या से निपटने के लिए उपकरण एवं आम जनता के साथ सहयोग स्थापित कर सभी व्यवस्थाएं चाक-चैबंध कर ली है। इस बार वनाग्नि को रोकने के लिए वन विभाग ने वन पंचायतों को विशेष पैकेज दिए है। जिसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में करीब बारह हजार वन पंचायतांे को सरकार द्वारा 2.67 करोड़ रूपये आवंटित कर दिए है। साथ ही वर्तमान में बढ़ती घटनाओं को देखते हुए करीब साढ़े तीन करोड़ रूपये और रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही शेष भुगतान भी वन पंचायतों को दे दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक पूरे प्रदेश में वनाग्नि से साढे बारह सौ हैक्टेयर जंगल जलने से करीब 21 लाख रूपये की नुकसान की सूचना मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले साल पूरे प्रदेश में वनाग्नि ने भीषण नुकसान पहुॅचाया था। जिसमें अभी तक चैवालिस सौ हेक्टेअर जंगल खाक हो गया था। जिस कारण वनों को व्यापक क्षति पहुॅचने के साथ वन्य जीवों एवं संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।

छह माह में विभाग को मिल जाएंगे 1218 नए फाॅरेस्ट गार्ड
अल्मोड़ा। चीफ कंजरवेटर जयराम ने बताया कि वन विभाग के पास प्रदेश में मैन पाॅवर की भारी कमी है। विभाग को वर्तमान में 1400 फाॅरेस्ट गार्डो की जरूरत है। जिसके सापेक्ष सरकार ने 1218 पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। उन्होंने बताया कि फाॅरेस्ट गार्ड भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि छह माह के भीतर विभाग को नए फाॅरेस्ट गार्ड मिल जाएंगे।

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