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पुराने रीति रिवाज नहीं भूले है बल्टा के लोग

आज के बदलते दौर में भी लोग अपनी परम्पराओ को भूले नहीं है, अल्मोड़ा मुख्यालय से सटे कसारदेवी क्षेत्र के बल्टा गाँव वासी आज भी इसी परम्परा को हर वर्ष भूमिया देवता की पूजा को बड़े धूम -धाम से मानते आ रहे है।  विकासखंड हवालबाग के बल्टा गाँव में भूमियाँ देवता की पूजा लगभग 100 साल पहले से होती आ रही है ।

गाँव के बड़े बुजुर्गो के अनुसार लगभग 100 साल पहले गाँव में जबरदस्त अकाल पड़ा, लगातार 3 साल सूखा पड़ने कारण  19 वी शताब्दी के प्रथम चरण में गाँव के लोग बहुत परेशान रहे थे  और  बड़ी तादात में पालतू पशु तथा खेती पूरी बंजर हो चुकी थी, तब गाँव के पंडो के द्वारा ग्रामवासियों को भूमियाँ देवता( भूमि देव) की पूजा व स्तुति करने को बोला गया। इसके बाद से जेठ माह की तपती गर्मी में हर वर्ष यह अनुष्ठान किया जाता है , फसलों व सब्जियों को अच्छी पैदावार व संतोषजनक बारिश तथा अपने गाँव के जनमानस व पशुओ की कुशलता व भरण पोषण हेतु भूमियाँ देव व मेघराज इद्र को खुश करने हेतु ये अनुष्ठान प्रति वर्ष बेहद प्रेमभाव व  बड़े पवित्र भाव से भूमि देवता के मंदिर में जाता है। इस दिन गाँव के ही राजपूत पुजारी सुबह से बिना अन्न ग्रहण किये हुये पूरे मंत्रों उच्चारण के साथ पूजा का शुभारंभ करते है, उस दिन पूरे गाँव के हर घर से आटा, लकड़ी आदि एकत्रित कर भूमिया देवता की पूजा की जाती है  ।  उस दिन गाँव के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है तथा हलवा, पूरी को प्रसाद के रूप में पूरे गाँव मे बाटा जाता है तथा देश विदेश बसे गाँववासियों को प्रसाद भेजा जाता है,  गाँव के निवासी दीपक मेहता के अनुसार इस अनुष्ठान के बाद बारिश होती है व फसल अच्छी होती है तथा कोई अनहोनी होने से भी गाँव की रक्षा होती है। गौरतलब है कि बल्टा गाँव को पूरे जिले अल्मोड़ा की  सब्जी उत्पादक गावो की श्रेणी में सबसे ऊपर स्थान दिया जाता है इसलिये मेघों से बरसते पानी का जेठ माह की तपती गर्मी में पूरे गाँव को उन बादलों का इंतज़ार रहता है, ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह मेहता की माने तो यह अनुष्ठान गाँव की सरहदों को व खेती को हमेशा सुरक्षित व हरा भरा रखता है तथा अच्छी फसल की गारंटी भी देता है।

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