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देहरादून में इंवेस्टर समिट कराने वाली सरकार का आल्पस कर्मियों के आंदोलन पर बेरुखी शर्मनाक,इंटक अध्यक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के पातालदेवी स्थित आल्पस दवा कंपनी के बंद होने के बाद श्रमिक सड़कों पर हैं। पिछले तीन दिनों से श्रमिक चौघानपाटा गांधी पार्क में क्रमिक अनशन कर रहे हैं। लेकिन शासन प्रशासन ने अभी तक आंदोलित कर्मचारियों से कोई वार्ता तक नहीं की है। इंटक के जिलाध्यक्ष दीपक मेहता ने सरकार के इस रवैये की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देहरादून में उद्योगों को बढ़ावा देने के नाम पर इंवेस्टर समि​ट में करोड़ों रूपया बहाने वाली सरकार को यह नहीं दिख रहा है कि अल्मोड़ा में आल्पस दवा फैक्ट्री के श्रमिकों के सामने दो जून रोटी की दिक्कत आ गई है।
जारी बयान में उन्होंने कहा कि सरकार मोटे मोटे पैसे वालो को उत्तराखंड में इन्वेस्टर समिट के नाम पे बुलाकर अपनी जेब भरने का काम कर रही है। लेकिन यहां उत्तराखंड के ही रहने वाले गरीब ये आल्पस के मजदूर बेबस आज पिछले 4 महीने से आंदोलन में बैठे हुए है। दुःख इस बात का नही है कि इनको न्याय नही मिल रहा है दुःख इस बात का है कि इनकी सुध लेने की कोई अहमियत ये सरकार के बहरे लोग नही ले रहे है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का रवैया भी शर्मनाक है और लगता है कि सभी को इन फैक्ट्री मजदूरों के मरने का इंतजार है। पाई—पाई को तरसे ये 150 श्रमिक आज अपने महीनों से रुके पारिश्रमिक व अपने फंड के लिये रोड में इस कड़कड़ाती ठंड में बैठकर सरकार से न्याय की भीख मांग रहे है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन पर भी कोई कार्रवाई करने में स्थानीय प्रशासन और सरकार नाकारा साबित हो रहा है। उन्होने कहा कि इंटक मजदूरों के साथ किए जा रहे इस उपेक्षा की कड़ी निंदा करता है। और श्रमिकोे की आवाज की अनसुनी करने वाले इस तंत्र के खिलाफ पुरजोर विरोध करेगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को बाध्य होगा।

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