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अल्मोड़ा उत्तराखंड

बंदर मरते रहे, वन विभाग दफन करता रहा

बंदर मरते रहे, वन विभाग दफन करता रहा
वन विभाग के रेस्क्यू सैंटर में लाए गए बेजुबानों ने तोड़ा दम
वन विभाग के पास नहीं है सही जानकारी


अल्मोड़ा- वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में आपरेशन के लिए लाए गए बंदरों की मौत से वन विभाग की मुस्तैदी की पोल खुल गई है| यहां लाए गए बंदर एक के बाद एक कर दम तोड़ते रहे और बिना पोस्टमार्टम किए उन्हें दफनाते रहा| पशु प्रेमी कामिनी कश्यप ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि या तो बंदरों की मौत भूख से हुई है या फिर लापरवाही के चलते आपसी संघर्ष में इनकी जान गई है| उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय शिकायत करने की बात कहते हूए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की|
इधर डीएफओ प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि नगर पालिका ने 50 बंदर पकड़ कर यहां भेजे थे| इनमें से 15 बंदर जगह नहीं होने के कारण छोड़ दिए गए थे जबकि पांच बंदरों की मौत हो गई है| 30 बंदर अभी भी पिंजरे में बंद हैं. उन्होंने कहा कि पकड़े जाने के दौरान चोट या अन्य कारणों से बंदरो की मौत हुई है| यह भी कहा कि कल इन बंदरों को जंगल में छोड़ दिया जाएगा|
मालूम हो कि एक माह पूर्व इन बंदरों को नगर क्षेत्र से पालिका ने पकड़ कर वन विभाग को सौपा था| जानकारी के अनुसार करीब चार सौ रुपये खर्च कर एक बंदर पकड़ा जाता है| इन बंदरों का रैस्क्यू सैंटर में बंध्याकरण होना था लेकिन व्यवस्थाओं के अभाव में वन विभाग अभी तक बंध्याकरण ऩहीं करवा पाया| सबसे बड़ा सवाल है कि यदि बंदरों की मौत आरोप के अनुसार भूख से हुई है तो फिर यह घोर लापरवाही है|वन विभाग के चीफ जयराज भी रैस्क्यू सैंटर को प्रभावी बनाने की बात पूर्व में अपने दौरे के दौरान कह चुके थे|

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