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बिग ब्रेकिंग सोशल मीडिया में वायरल हुए पत्र ने बढ़ाई सरकार और वन विभाग की मुश्किलें

अल्मोड़ा।  नैनोली में गुलदार को आदमखोर घोषित किये जाने पर विभागीय अधिकारियों में सर फुटोव्वल की स्थिति हो गयी है। लगातार दो महीने से गुलदार इस गावं में कई लोगों पर हमला कर चुका है। शनिवार को राज्यमंत्री रेखा आर्या के गांव में आने के बाद जब लोगो ने सवाल किये कि गुलदार की गांव में दहशत  बावजूद आज तक कोई कार्यवाही क्यों नही हुई तो इस मामले में एक दूसरा ही पक्ष सामने आया। सोशल मीडिया में वायरल हुए मुख्य वन जीव प्रतिपालक मोनिष मल्लिक के आज 15 सितंबर को भेजे पत्र में कहा गया है कि गुलदार को टेंकुलाइज करने और नष्ट करने की अनुमति पूर्व में ही 21 जुलाई को दी जा चुकी है। पत्र में अल्मोड़ा वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी पंकज कुमार पर पत्र को ना देखने की बात कही गयी है। यह अनुमति 15 दिन के लिये जारी की गयी थी जो कि 5 अगस्त को समाप्त हो गयी। वन्य जीव प्रतिपालक के पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रभागीय वनाधिकारी ईमेल को नही देखते है। इस पत्र के सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद से वन विभाग की कार्यप्रणाली की कलई खुल गयी है। आखिर क्या कारण है कि वन विभाग के अधिकारियों को 21 जुलाई के पत्र. का पता ही नही चल सका और।यदि प्रभागीय वनाधिकारी डिवीजन में नही थे तो क्या वन्य जीव प्रतिपालक को इसकी जानकारी नही थी। क्षेत्रीय विधायक व राज्यमंत्री रेखा आर्या को इस पत्र की जानकारी होने के बारे में भी कुछ पता नही चल सका है। इधर वन विभाग ने गुलदार को नष्ट करने के लिये समयावधि को फिर से 15 दिन के लिये बढ़ा दिया है।

इधर पूछे जाने पर प्रभागीय वनाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि वह 4 जून से 5 अगस्त तक डिवीजन में नही थे । कहा कि 5 अगस्त की सायं 4.50 पर उन्होने कार्यभार ग्रहण किया और उन्हे यह नही पता कि 21 जुलाई को वन्य जीव प्रतिपालक का क्या पत्र डिवीजन को भेजा गया। इस पूरे मामले ने जीरो टालरेंस की सरकार को भी कठघरें में खड़ा कर दिया है। आखिर सरकार के नुमाइंदे दो महीने के समय से क्या कर रहे थे। दो दिन के भीतर जब गुलदार का आतंक ज्यादा बढ़ गया तो राज्यमंत्री गांव में गयी और इसके बाद वन विभाग के अधिकारी एक दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आ रहे है

इस पत्र के वायरल होने पर मचा हैं हंगामा 

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