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धान के बकाने रोग के नियंत्रण की जानकारी दी

धान के बकाने रोग के नियंत्रण की जानकारी दी


अल्मोड़ा – विकासखंड हवालबाग के न्याय पंचायत-गवालकोट, ग्राम -भाट नयाल/ज्युला में फार्म स्कूल (कृषि)अंतर्गत प्रदर्शन हेतु बोई गई फसल धान पीबी 1509 में लग रहे बकाने रोग के बारे में किसानों को जरूरी सलाह दी गई| कृषि विज्ञान केंद्र मटेला के डॉक्टर बीडी सिंह द्वारा कृषकों को बताया गया कि इस रोग के लक्षण रोपाई करने के 2 – 3 सप्ताह में दिखाई देता है। इसमें रोगग्रस्त पौधा अन्य पौधों की अपेक्षा अधिक लंबा हो जाता है जिस कारण इसे झंडा या बकाने रोग कहते हैं। वातावरण में अत्याधिक आद्रता होने के कारण इसमें सड़न भी देखा गया है, जिस से संक्रमित पौधा सड़कर समाप्त हो जाता है, यदि वह पौधा नष्ट नहीं होता है तो उसकी बढ़वार सामान्य से ज्यादा बढ़ जाती है तथा पत्ते पीले होने लगते हैं और उसकी बालियों में दाना नहीं बनता है। यह रोग फ्यूजेरियम नामक फफूंदी के संक्रमण से होता है तथा बीज जनित रोग है और संक्रमित बीज के द्वारा पौधों में संक्रमण होता है। तथा बाद में खड़ी फसल में इस रोग में बीजाणु हवा द्वारा फैलकर स्वस्थ पौधों को भी संक्रमित कर देते हैं।
इसकी रोकथाम के लिए प्रोपीकोनाजोल- 1मिली प्रति लीटर और मेंकोजेब- 2-2.5 ग्राम/लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए उसके बाद 8-10 दिन बाद पुनः इसी दर से छिड़काव कर इस रोग से रोकथाम की जा सकती है।

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