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मुख्यमंत्री जी….कब तक रहेगा डाक्टरविहीन स्वास्थ्य केन्द्र

  फोटो।प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शान्तिपुरी

रिर्पोटरमैडी मोहन कोरंगा

#    4 साल से स्थायी डाक्टर के राह देखता प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शान्तिपुरी
#      किच्छा में मुख्यमंत्री के आगमन पर क्षेत्र की जनता कर रही है सवाल
#      2013 में महिला व 14 में पुरूष डाक्टर के जाने के बाद डाक्टरविहीन है अस्पताल
शान्तिपुरी। एक समय था जब क्षेत्र का एकमात्र सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में महिला व पुरूष दो डाक्टर होने के कारण बिन्दुखत्ता,शान्तिपुरी,गोलगेट, जवाहरनगर, श्रीलंका टापू, सूर्यनगर आदि की लगभग 40 हजार की आबादी से गरीब व लोग इलाज कराने के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में आते थे। परन्तु दोनों डाक्टरों के जाने के बाद लगभग चार साल बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र डाक्टरविहीन है। वही कुछ महीने पहले एक डाक्टर की नियुक्ति की भी गई थी परन्तु वह भी एक महीने में ही यहॉ से चली गई। स्थायी डाक्टर के न होने से आम व गरीब जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है।
बताते चले कि पा्रथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से 2013 में महिला व 2014 में पुरूष डाक्टर का स्थानांन्तरण हो गया था। जिसके बाद डाक्टरवीहिन स्वास्थ्य केन्द्र में गरीब व आम लोगो को ईलाज के लिये परेशानी होने लगी। खासकर महिलाओं का दर्द तो स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर न होने से दुगना हो गया क्योंकि क्षेत्र में दूर दूर तक महिलाओं का इलाज करने के लिये डाक्टर नही है। जहॉ पहले अस्पताल गरीब व आम लोगो का इलाज के लिये तॉता लगा रहता था वही अब डाक्टर न होने से स्वास्थ्य केन्द्र मरीजो की संख्या काफी कम हो गई है। विडंबना देखिये राज्य व केन्द्र सरकार बेटी बचाओं बेटी पढाओं व महिलाओं को आगे लाने के लिये कई योजनायें ला रही है परन्तु हकीकत में महिलाओं की सबसे बडी समस्या स्वास्थ्य को लेकर कितनी गंभीर है यह 2014 से प्राथमिक स्वाथ्य केन्द्र में स्थायी महिला या पुरूष डाक्टर न होना दर्शाता है। वही अस्पताल के फार्मेसिस्ट का भी 2 माह पूर्व व पुरूष स्टाफ नर्स का स्थ्नांनतरण हो चुका है और किच्छा से खानापूर्ति के लिये फार्मसिस्ट को अटैच किया है जिनका कभी कभी अस्पताल में आना होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अब दो स्टाफ नर्स पुष्पा बिष्ट, ममता नेगी, अटैच फार्मसिस्ट, एक वार्डब्याय व एक स्वच्छक के सहारे चल रहा है।
वही 2018 में अप्रैल में स्थायी महिला डाक्टर ने ज्वाइन तो किया परन्तु लगभग एक महीने के अंदर ही डाक्टर के चले जाने से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एक बार फिर डाक्टर विहीन हो जाने से क्षेत्रीय जनता स्वास्थ्य विभाग व सरकार की बेरूखी व स्थायी डाक्टर की नियुक्ति न होने से जनता अपने को ठगा व इसे अपनी भावनाओं के साथ भददा मजाक मान रही है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की क्षेत्र में ग्रामीणों खासकर महिलाओं व लडकियों के लिये कितनी महत्तवता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में पुरूष डाक्टर के कई प्राइवेट क्लीनिक है परन्तु महिलाओं के लिये दूर दूर तक न तो सरकारी अस्पताल में महिला डाक्टर है न ही पा्रईवेट क्लिनिक में। महिलाओं को लगभग 10 किमी किच्छा, लगभग 25 किमी रूद्वपुर या फिर 40 किमी हल्द्वानी जाकर सरकारी या फिर प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराना पडता है। जिससे समय के साथ साथ काफी अतिरिक्त धन होता है। आर्थिक रूप से मजबुत लोग तो खर्चा वहन कर लेते है परन्तु मध्यम वर्ग या फिर गरीब तबके के लोगों के लिये इस तरह की स्थिति जी का जंजाल बन जाती है। या तो वह कर्जा लेकर इलाज कराते है या फिर इलाजविहीन होकर दम तोड देते है। इससे पूर्व कई बार पहले भी डाक्टर के न होने पर जनता के द्वारा आक्रोश व्यक्त किया। क्षेत्रीय महिलाओं ने अस्पताल में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना के लिये स्वास्थ्य विभाग व सरकार को जिम्मदार ठहराया है।

   ***जनता की आवाज***

# एक महीने में ही चली गई स्थायी महिला डाक्टर
शान्तिपुरी। लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में एक स्थाई महिला डाक्टर की नियुक्ति अप्रैल माह में होने से शान्तिपुरी 1,2,3,4, जवाहरनगर, शान्तिनगर, टुटीपुलिया, गोलगेट, सूर्यनगर, बिन्दुखत्ता, श्रीलंका टापू, आदि से इलाज के लिये आने वाले लगभग 40 हजार आबादी के मरीजो की खुशी दुगनी हो गई थी परन्तु इलाज कराने आने पर उनकी सारी खुशी महिला डाक्टर के चले जाने से निराशा में बदल गई। जनता का कहना है कि चार साल बाद डाक्टर तो दिया था वो भी एक ही महीने में चला गया गरीबों के साथ इससे भद्दा मजाक क्या हो सकता है।

#  प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर न होना गरीबा जनता से मजाक

    कविता तिवारी- ग्रामीण

शान्तिपुरी। कविता तिवारी। ग्राम न02 निवासी कविता तिवारी का कहना है कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य को बहुत अधिक महत्तता दी है परन्तु केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बाद भी चार साल से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर की नियुक्ति न होना उनकी गंभीरता को दर्शाता है। क्हा कि लगभग 4 सालों में कई बार संघर्ष करने के बाद सरकारी अस्पताल में डाक्टर नियुक्ति हुई थी। वही महिला डाक्टर होने से क्षेत्रीय महिलाओं को काफी को काफी आशायें थी। एक बार फिर डाक्टर के जाने से जनता में आक्रोश व्याप्त हो गया। विभाग व सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केंन्द्र में डाक्टर की नियुक्ति को गंभीरता से न लेकर जनता सिर्फ मजाक बना रही है।

#दिखावे की राजनीति कर रही है भाजपा सरकार
शान्तिपुरी।  पूर्व दर्जा राज्य मंत्री  डा0 गणेश उपाध्याय

डा0 गणेश उपाध्याय पूर्व दर्जा राज्य मंत्री

ने कहा कि जहॉ काग्रेस शासन काल में महिला व पुरूष दो डाक्टरों की नियुक्ति प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में थी तथा गरीब व असहाय लोगो का इलाज काफी कम शुल्क में हो जाता था। परन्तु अब गरीब और असहाय लोगो को इमरजेंसी में किच्छा, रूद्वपुर या हल्द्वानी जाकर इलाज कराना पडता है जिसमें काफी समय तो लगता ही है वही मरीजो की जान का खतरा भी बना रहता है। अब बीते 4 साल बाद डाक्टर की नियुक्ती के बाद एक महीने में ही फिर अस्पताल का डाक्टरवीहिन होना यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार सिर्फ दिखावे की राजनीति कर रही है बल्कि धरातल पर सब कुछ शुन्य है।

झुनझुना पकडाकर जनता की आवाज को दबा रही है सरकार   
शान्तिपुरी।

विनोद कोरंगा – जिला पंचायत सदस्य

विनोद कोरंगा- जिला पंचायत सदस्य। जिला पंचायत सदस्य विनोद कोरंगा का कहना है कि
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर की व्यवस्था न कर सरकार की आम व गरीब लोगो का मजाक बना रही है। कभी अस्थायी य फिर कभी एक महीने ही डाक्टर की व्यवस्था कर सरकार सिर्फ झुनझुना पकडाकर जनता की आवाज को दबाने का काम कर रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पिछले 4 साल बाद डाक्टर की नियुक्ति होकर बिना दूसरे डाक्टर की नियुक्ति के बिना एक ही महीने में चले जाना सरकार की जनता के प्रति गंभीरता को दर्शाती है।

जनता की मनोदशा समझकर सरकार को करनी चाहिए डाक्टर की व्यवस्था

दीपा कोरंगा गा्म प्रधान

शान्तिपुरी। गा्म प्रधान दीपा कोरंगा का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर के न होने से अस्पताल सिर्फ दिखावे का अस्पताल बन गया है। पहले जब दो डाक्टर थे दूर दूर से मरीज आते थे व इलाज भी अच्छी तरह से होता था। प्रदेश के मुख्यमंत्री को जनता की मनोदशा समझते हुऐ पूर्व की तरह महिला व पुरूष डाक्टर की व्यवस्था करनी चाहिए।

 

 

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