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अल्मोड़ा उत्तराखंड

दुखदः- नहीं रहे सांस्कृतिक नगरी के साम्प्रदायिक सौहार्द के स्तंभ

Pithoragarh

राज्य आंदोलनकारी इनायत हुसैन के निधन पर शोक की लहर

अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में सांप्रदायिक सौहार्द के स्तंभ के रूप में जाने जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ आंदोलनकारी और जागरूक नागरिक इनायत हुसैन का निधन हो गया है। वह 86 वर्ष के थे। नशा नहीं रोजगार दो सहित कई आंदोलनों में उन्होंने सक्रिय भागीदारी की।
इनायत हुसैन सांप्रदायिक सौहार्द के परिचायक भी थे। 1997 में मुरली मनोहर दशहरा समिति के वह संयोजक भी रहे। उन्होंने मुरलीमनोहर में रामलीला का सफल संचालन भी किया। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वह सर्वदलीय संघर्ष समिति के सदस्य भी रहे। अल्मोड़ा में गठित नागरिक मंच के भी वह सक्रिय रूप से जुड़े रहे। वह प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखते थे और यूनानी चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों का उपचार भी करते थे।
उनके निधन पर विभिन्न संगठनों ने गहरा शोक जताया है। उत्तराखंड लोकवाहिनी के अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि वर्तमान में जहां धर्म के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा है। उस दौर में इनायत हुसैन का दुनिया से चला जाना दुखद है। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। वाहिनी की शोक सभा में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जगदीश लाल साह के भी श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।शोक सभा में जगत रौतेला, पूरन चंद्र तिवारी, जंग बहादुर थापा, डा. दया कृष्ण कांडपाल, शेर बहादुर गुरंग,कमलेश थापा, हरीश मेहता,बिशन दत्त जोशी, सुशीला धपोला, रेवती बिष्ट, अजय मेहता,अनीसउद्दीन आदि मौजूद थे।

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