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एक माह के लिए घी की गुफा में साधनारत हुए भगवान जागनाथ, 51 किलो देशी घी से बनाया गया घृत कमल

जागेश्वर से कैलाश भट्ट की रिपोर्ट :-द्वादश ज्योतिर्लिंग श्री जागेश्वर धाम में आज मकर संक्रान्ति के अवसर पर सुबह पांच बजे से ही ब्रंमकुड घाट पर डुबकी लगाने व यज्ञोपवीत के लिए हजारों लोगों की भीड़ जमा रही।
वहीं ज्योतिर्लिंग जागनाथ मंदिर में प्राचीन परंपराओ के अनुसार 51 किलो घी को पानी में उबालकर शुद्ध कर गुफा रुप दिया गया, इससे शिवलिंग को एक माह के लिए बंद कर दिया गया है, पौराणिक मान्यता के भोलेनाथ ने एक माह गुफा में कठोर तप किया था, इसी परंपरा को आगे बढाते हुए हर वर्ष घृत कमल बनाकर पूजन किया जाता है।

इधर मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंग जागेश्वर धाम में आज हजारों लोगों ने ब्रमकुंड में स्नान कर भोलेनाथ के दर्शन किये, वही सुबह पांच बजे से ही ब्रम कुंड घाट पर यज्ञोपवीत करने वालो की भीड़ रही, मान्यता के अनुसार जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का संयोग बनता है। इसी दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं। इनके उत्तरायण होने से पृथ्वी के जीवों को सूर्य की भरपूर कृपा मिलनी शुरू हो जाती है। सूर्य की भरपूर रोशनी हमें प्राप्त होती है। इस वर्ष मकर सक्रांति का विशेष महत्त्व है क्योंकि सूर्य तब मकर राशि में प्रवेश करेंगे जब अश्विनी नक्षत्र रहेगा, जो कि केतु का नक्षत्र है,

पौराणिक परंपराओ के अनुसार मकर संक्रांति (माघ माह) में भोलेनाथ जी एक माह कठोर तप के लिए गुफा में चले गए थे, इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर जागेश्वर धाम के ज्योतिर्लिंग जागनाथ में विशेष पूजन किया जाता है, इस बार 51 किलो गाय के घी से गुफा तैयार की गयी थी, घी को पानी में उबालकर शुद्ध किया जाता है, उससे गुफा रुप तैयार कर एक माह “पवित्र माघ” के लिए भोलेनाथ को ढक देते है, यह प्रकिया धाम के मुख्य पुजारी हेमन्त भट्ट के द्वारा पूरे मंत्र उच्चारण व विधि विधान से की गयी, एक माह के बाद उस गुफा रुपी घी को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है, इस घी को अपने सिर में मलने से समस्त प्रकार के रोगो से मुक्ति मिलती है, कई असाध्य रोगो के लिए यह वरदान साबित होता है। इस विशाल घृत कमल पूजन में शामिल जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रबंंधक भगवान भट्ट, पंडित लक्ष्मी दत्त भट्ट, पंडित रमेश भट्ट, आचार्य गिरीश भट्ट, पंडित पिताम्बर भट्ट, पंडित कस्तुवानंद भट्ट, पंडित निर्मल भट्ट, आचार्य हंशादत्त भट्ट, पंडित उर्वादत्त भट्ट, पंडित कमल भट्ट, भुवन चंद्र भट्ट, पंडित हेम चन्द्र भट्ट व रोहित भट्ट सहित कई पुजारी पुरोहित शामिल थे।

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