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दिव्यांग भरत सिंह की कौन सुनेगा

काली कुमाऊं के दिव्यांग भरत सिंह को नहीं मिल रहा दिव्यांग पेंशन सुविधा का लाभ

ललित मोहन गहतोड़ी / नकुल पंत

चम्पावत। काली कुमाऊं के लोहाघाट विकास खंड के ढोरजा निवासी दिव्यांग भरत सिंह को अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिल रही है। इस दिव्यांग युवक के पास अपनी दिव्यांगता का लाभ लेने के लिए एक अदद दिव्यांगता प्रमाण पत्र तक नहीं। यह युवक जन्म से ही दिव्यांग है जो रात दिन बिस्तर पर लेटा अपनी किस्मत को कोस रहा है।

ढोरजा निवासी दिव्यांग भरत सिंह अभी तक सरकारी सुविधाओं से वंचित है। २५ वर्षीय यह दिव्यांग युवक दिन भर बिस्तर पर पड़े पड़े जीने को मजबूर है। लगभग छह वर्ष पूर्व भरत सिंह के पिता की मौत के बाद यह परिवार आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। बावजूद इसके अभी तक परिवार को आर्थिक सहायता मिलनी तो दूर अभी तक परिवार के दिव्यांग भरत का आधार कार्ड तक नहीं बन सका है। और वह राज्य सरकार द्धारा मिलने वाली दिव्यांग पेंशन योजना के बारे में भी नही जानता। एक अभागी मां के अलावा इस परिवार की तरफ देखने वाला कोई नहीं है।

भरत के दिव्यांग कार्ड ना बन पाने के बारे में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरपी खंडूरी से पूछा गया तो उन्होने इस पर अपनी अनभिज्ञता जताई। कहा कि इस बात की उन्हें जानकारी नहीं है। कहा कि यदि किसी पात्र प्रार्थी का आधार कार्ड बना हो और वह आयोजित होने वाले दिव्यांग शिविरों में शिरकत कर अपनी जांच कराता है, तो उसे दिव्यांग पेंशन योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। उन्हेाने संबंधित पत्रावली तैयार कर उक्त दिव्यांग को पात्रता में शामिल करने की बात कही।

दिव्यांगों के लिये लगाये गये शिविर में अव्यवस्था  से दो चार हुए दिव्यांग 

करीब तीन वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जारी विकलांग शब्द को बदलकर दिव्यांग कहे जाने की बात कही थी। और इसके बाद सरकारी महकमें में दिव्यांग शब्द को विकलांग कर दिया गया।जिले में तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के मौके पर लगाये गये कैंप में में दिव्यांग हितों के कल्याणार्थ चिकित्सा प्रमाण पत्र, निर्वाचन पहचान पत्र, बस पास आदि प्रमाण पत्रों को जारी करने के लिए प्राथमिक विद्यालय गोरलचौड़ में कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप में दिव्यांगों के लिये जरूरी सुविधाओं का भी अभाव रहा। सुविधाओं की बात की जाए तो दिव्यांगों के लिये इस स्थल में चढ़ने-उतरने के लिए रैंप आदि की सुविधा नहीं थी। इस कारण अस्थि विकृत दिव्यांगों को चढ़ने-उतरने मैं परेशानी का सामना करना पड़ा ।कैंप में मौजूदा स्थल पर व्हील चेयर, फोल्डेबल व्हील चेयर आदि भी उपलब्ध नहीं थी ।

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