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खास खबर घोटालों का ऊर्जा निगम भाग 1


उत्तरा न्यूज डेस्क

उत्तरा न्यूज डेस्कत्तराखण्ड को वैसे तो ऊर्जा प्रदेश माना जाता है। लेकिन ऊर्जा विभाग में कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी उम्मीद बिल्कुल नही थी। लोगों को उम्मीद थी कि पर्यटन और ऊर्जा के सहारे से राज्य उन्नति के नये सोपान स्थापित करेगा। लेकिन अगर हम 18 वर्ष का सफरनामा देखे तो हमारे हाथ निराशा ही आयेगी। राज्य गठन से पहले उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, तब यूूपी में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद विद्युत उत्पादन, विद्युत पारेषण (टांसमिशन), और विद्युत वितरण का कार्य करता था। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद इसे तीन भागों में बांट दिया गया। पहला विद्युत आपूर्ति के लिये उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल ), ट्रांसमिशन के लिये पावर ट्रांसमिशन कार्पोरेशन आॅॅफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल ) और विद्युत उत्पादन के लिये उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) को जिम्मेदारी दी गयी। पहले भाग में हम चर्चा करेगे कुमाऊं के एक छोर जसपुर की जो कि भौगोलिक रूप से यूपी की सीमा से लगा हुआ है। ​विद्युत वितरण खंड जसपुर इस बीच काफी चर्चाओं में रहा है। यहा एक लिपिक ने बिल की वसूली गयी करीब 8 लाख की धनराशि विभागीय खाते में ना जमाकर अपने पास रख ली। हैरानी की बात यह है कि विभाग के आला अधिकारियों को इसका पता काफी देर से चला। आनन फानन में यह मामला मीडिया में लीक होने पर अधीक्षण अभियंता राजकुमार द्वारा लिपिक नितिन शर्मा को निलंबित कर दिया गया। इससे 6 माह पूर्व फरवरी 2018 में भी इसी तरह का 45 लाख रूपये के गबन का मामला सामने आया था और उस समय लिपिक हुकुम सिंह, तत्कालीन उपखंड तथा सहायक अभियंता (राजस्व ) की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे सुनील कुमार, तत्कालीन अधिशासी अभियंता ​शि्​शिर श्रीवास्तव, लिपिक संदीप कुमार सक्सेना तथा लेखाकार अरविंद सिहं रावत को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन अगर हम इन दोनो गबन के मामलें को देखे तो विभागीय उच्चाधिकारियों ने एक ही जैसे गबन के मामले में दोहरा मापदंड अपनाया है। जहां फरवरी 2018 के गबन में अधिशासी अभियंता से लेकर, सहायक अभियंता राजस्व , दो लिपिक तथा लेखाकार को निलंबित किया गया था वही अगस्त 2018 में हुए 8 लाख के गबन में केवल लिपिक का ही निलंबन कर खानापूर्ति का प्रयास किया गया। जसपुर विद्युत वितरण खंड सिंतबर माह में फिर चर्चाओं में रहा जब बिना विभाग से बगैर इस्टीमेट और बगैर अनु​मति के एक पेपर मिल के लिये 33 केवी की पुरानी लाईन मौजूद होते हुए भी उसी के समानांतर 3 किमी लंबी 33 केवी की एक नई लाईन का निर्माण कर दिया गया। इस मामले में एक वीडियों भी वायरल हुआ है।

इस संबध में विधायक आदेश चौहान ने मौके पर जाकर उप खंड अधिकारी पंकज कुमार और अधिशासी अभियंता अजीत यादव से लाईन के बारे में पूछा तो दोनो ही कोई संतोषजनक जबाब नही दे सके विधायक ने इस्टीमेट और विभागीय स्वीकृति के बारे में पूछा तो दोनो के पास कोई जबाब नही था। इसके बाद विधायक ने काम रूकवाने को कहा।

काशीपुर सर्किल के अधीक्षण अभियंता अधीक्षण अभिंयता राजकुमार तब चर्चाओं में रहे जब 1.60 करोड़ के कार्य के लिये 2.2 करोड़ रूपयें का टेंडर निकाले जाने का मामला सामने आया।  इसकी विभागीय जांच कुमाऊं क्षेत्र हल्द्वानी के मुख्य अभियंता ( वितरण ) एचके गुरूरानी कर रहे है।

ऊर्जा निगम में गड़बड़ियों की यहा फेरहिश्त काफी लंबी है। दूसरा भाग जल्द ही हम आपके सामने लेकर आयेंगे।

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