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पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार की जीवटता आपके लिए भी बनेगी प्रेरणा, मां ने मजदूरी कर खरीदा रैकेट, अब मिला अर्जुन पुरस्कार

पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार की जीवटता आपके लिए भी बनेगी प्रेरणा, मां ने मजदूरी कर खरीदा रैकेट, अब मिला अर्जुन पुरस्कार


डेस्क: एक तो गरीबी और उस पर शारीरिक अक्षमता यह दो बड़े अवरोध हैं जो बड़े से बड़े हौसलेमंदों को निराश कर देते हैं लेकिन रुद्रपुर के बंगाली काँलोनी में रहने वाले मनोज सरकार ने अपनी जीवटता और मेहनत के चलते अर्जुन पुरस्कार को हासिल किया है| राष्ट्रीय स्तर पर 52 पदक जीतने वाले मनोज को राष्रपति रामनाथ कोविंद ने यह पुरस्कार दिया है| पुरस्कार में प्रमाणपत्र के साथ ही पांच लाख रुपए की धनराशि मिलती है| उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ट्वीट कर बधाई दी है|
पैरा बैडमिंटन की विश्व रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी मनोज के इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। गरीबी, शारीरिक अक्षमता के अलावा सिर से पिता का साया उठने के बावजूद मनोज पूरी जीवटता से अपने लक्ष्य साधना में लगे हैं|
रुद्रपुर की बंगाली कालोनी में मनोज सरकार का बचपन बेहद गरीबी में बीता है। मां जमुना सरकार के मुताबिक मनोज जब डेढ़ साल का था, तो उसे तेज बुखार आया था। आर्थिक दशा ठीक नहीं होने के कारण एक झोलाछाप से इलाज कराया।लेकिन दवा खाने के बाद से उसके एक पैर में कमजोरी आ गई। गरीबी के चलते मनोज स्कूल की छुट्टी के दिन अपने पिता के साथ घरों में पुताई का काम भी किया है। ट्यूशन से खर्चे पूरे करने लगा। बैडमिंटन का दीवाने मनोज ने जब अपमे मातापिता से रैकेट की जिद की मां का कहना है कि खेतों में काम करके जुटाये पैसों से बेटे के लिए बैडमिंटन का रैकेट खरीदा था। एक पांव से कमजोर होने के बावजूद इंटरमीडिएट तक उसने एक सामान्य खिलाड़ी के तौर पर तीन राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। उसे अच्छा खेलता देख बैडमिंटन खिलाड़ी डीके सेन ने पैरा बेडमिंटन टीम में खेलने की सलाह दी।अपने प्रदर्शन के बल पर मनोज ने जल्द ही नेशनल फिर इंटरनेशन पैरा बैडमिंटन टीम में जगह बना ली। वर्ष 2017 में पिता मनिंदर सरकार के निधन के बाद मनोज काफी टूट गया था, लेकिन उसने हौंसला नहीं हारा और वर्तमान में पैरा एशियन गेम की तैयारियों में जुटा हुआ है।छोटे भाई मनमोहन का कहना है कि दो भाई और दो बहनों में मनोज दूसरे नंबर का है। मनोज को अर्जुन अवार्ड मिलना रुद्रपुर और कुमाऊं समेत पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।  

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