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उत्तराखंड में बंदरों के आतंक की समस्या पीएमओ पहुंची 

प्रधानमंत्री मोदी से बंदरों से निजात दिलाने के लिये ‘नमो एप’ पर लगायी गुहार 

रवीन्द्र देवलियाल

नैनीताल । उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों व वन्य जीवों का आतंक एक बड़ी चुनौती बन गयी है। पहाड़ सी जिदंगी के आगे उत्तराखंड के लोग पहले ही पस्त थे लेकिन वन्य जीवों व बंदरों की इस समस्या ने जनता को झकझोर कर रख दिया है। वन्य जीवों के आतंक के चलते पहाड़ की कृषि तबाह हो गयी व हरे भरे रहने वाले खेत बंजर पड़ गये हैं। लोग बेकार व बेरोजगार हो गये हैं। इससे प्रदेश में तेजी से पलायन बढ़ रहा है। पहाड़ खाली हो रहे हैं।

इस पहाड़ सी समस्या का न तो प्रदेश सरकार व न ही वन विभाग के पास कोई समाधान दिखायी दे रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में चुनावों में अब विकास मुद्दा नहीं रहा बल्कि वन्य जीवों के आतंक से निजात दिलाने का मुद्दा पहले नम्बर पर रहा है लेकिन हासिल सिफर है। अब हार झक मार कर लोग इस समस्या से निजात दिलाने के लिये केन्द्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं। 
बंदरों की इसी समस्या से निजात दिलाने के लिये प्रदेश की गैर सरकारी संस्था देवभूमि जनसेवा समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का दरवाजा खटखटाया है। संस्था के संचालक राजेन्द्र सिंह नेगी ने दो दिन पहले ही नमो एप पर प्रधानमंत्री को संबोधित एक शिकायत भेजी है। नमो एप पर श्री नेगी की इस शिकायत को पंजीकृत कर लिया गया है। इस शिकायत का पंजीकरण संख्या पीएमओ/ई/2018/0453790 है। 
द्वाराहाट निवासी श्री नेगी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। पहाड़ की जनता बेरोजगार हो गयी है। बंदर खेती को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कृषि व वानिकी पूरी तरह से तबाह हो गयी है। खेत बंजर हो गये हैं। बंदर फसल को होने से पहले ही तबाह कर दे रहे हैं। ऐसे में पहाड़ की पूरी आर्थिकी बिगड़ गयी है। लोगों की बाजार पर निर्भरता बढ़ गयी है। 
प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत में कहा गया है कि पहले पहाड़ों में किसान खेतीबाड़ी पर निर्भर रहता था। काश्तकार फल, साग-सब्जी के साथ साथ परंपरागत खेती करता रहता था लेकिन अब वन्य जीवों के चलते कुछ नहीं कर पा रहा है।
वन विभाग व राज्य सरकार के पास इस महामारी से निपटने के लिये कोई योजना नहीं है। सरकार हमेशा बजट का रोना रोती रहती है। बेकारी व बेरोजगारी की इस समस्या ने पलायन की दर में बढ़ोतरी कर दी है। शिकायत में कहा गया है कि यह समस्या उत्तराखंड के एक जनपद व ब्लाक की नहीं बल्कि समूचे पहाड़ी क्षेत्रों के काश्तकारों की है।
शिकायत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की गयी है। साथ ही उल्लेख किया गया है कि काश्तकारों को इस समस्या के बदले किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं मिलता है।

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