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हाई कमान तक बात पहुचाने की बात कहते कहते रो पड़े पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा

अल्मोड़ा। 5 अगस्त को कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित होने के बाद कांग्रेस में असंतोष थमने का नाम नही ले रहा है । विगत 16 अगस्त को जिलाध्यक्ष पद से हटाये गए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह महरा ने आख़िरकार चुप्पी तोड़ते हुए अल्मोड़ा कद्दावर कॉग्रेसी नेता गोविन्द सिंह कुंजवाल से ही सवाल पूछ डाला। यहाँ जिला पंचायत परिसर चौघानपाटा में कांग्रेस से जुड़े अपने समर्थकों के साथ उन्होंने सवाल किया कि उनके बारे में कहा जा रहा है कि वह किसी और गुट के है आज तक उन्होंने हरीश रावत को अपना नेता माना है और आगे भी मानते रहेंगे चाहे हरीश रावत जो भी कहे। कहा कि उनकी वर्तमान जिलाध्यक्ष पीताम्बर पांडेय से कोई नाराजगी नही और उन्हें फिर से जिलाध्यक्ष बनाने का वह स्वागत करते है, उन्हें सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की है कि उनके बारे में यह बोला जा रहा है मोहन सिंह महरा ने विधानसभा चुनावों में उनकी खिलाफत की। श्री महरा ने अपने क्षेत्र् में मिले मतों का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया। कहा कि 2017 में विकट परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं ने मेहनत कर कुंजवाल जी को जितवाया और इसका पहला ईनाम 3 महीने के भीतर तब मिला जब कांग्रेस के धौलादेवी ब्लॉक अध्यक्ष मोहन सिंह सिंगवाल को हटा दिया गया। और अब उनके साथ इस तरह का बर्ताव किया जा रहा है।

 

 

उन्होंने कहा कि जब जिलाध्यक्ष के नाम पर उनके नाम पर विचार हो रहा था तो उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को फोन कर पीताम्बर पांडेय को ही अध्यक्ष बनाने को कहा, और पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत से भी यही कहा। कहा कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाए जाने का मलाल नहीं है इस बात से नाराजगी है कि उनके बारे में दुष्प्रचार किया जा रहा है।

 

रुंधे गले से बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने 12 अगस्त को पत्रकार वार्ता में कांग्रेस संगठन में किसी भी प्रकार के मनमुटाव को सिरे से खारिज किया था। आरोप लगाते हुए कहा कि गोविन्द सिंह कुंजवाल जी बार बार मीडिया के माध्यम से कहते रहे कि मोहन सिंह महरा ने जागेश्वर विधानसभा में कांग्रेस और उनका विरोध किया। कहा कि इसके बाद इन्होंने खुद कुंजवाल जी के साथ डोल आश्रम में 2 घण्टा वार्ता हुई और कुंजवाल जी से आग्रह किया कि यह पार्टी का आतंरिक मामला है इसे सड़क पर नहीं लाना चाहिए। इस पर श्री कुंजवाल ने कहा कि 

आपसे मेरी कोई नाराजगी नहीं है मेरी लड़ाई प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश से है लेकिन उन्हे आश्चर्य तब हुआ जब 16 अगस्त को पूरे प्रदेश में केवल उन्हें हटाकर कुंजवाल जी द्वारा अपनी राजनीतिक लड़ाई को समाप्त कर दिया गया। 

उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही है और पार्टी ने उन जैसे कार्यकर्ता को बहुत कुछ दिया है, मगर जिस तरह से मीडिया के सामने बाते आ रही है उससे वह बेहद आहत है, अगर उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा जाता तो वह ख़ुशी ख़ुशी इस्तीफा दे देते। रुंधे गले से बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि हाई कमान ने उन्हें न्याय नहीं दिलाया तो 15 दिन के भीतर वह अपने सहयोगियो के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। उनके साथ इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष धौलादेवी मोहन सिंह सिंह सिंगवाल, एन डी भट्ट , जिला पंचायत सदस्य बालम सिंह भाकुनी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रमेश जोशी,आनंद प्रसाद, जिला कांग्रेस कमेटी उपाध्यक्ष गोविन्द सिंह सिजवाली,लाल सिंह बजेठा,हीरा सिंह भाकुनी, केसीडीएफ अध्यक्ष अमरनाथ सिंह रावत, एडवोकेट कृष्ण सिंह बिष्ट,दिनेश पिलख्वाल,हरीश भाकुनी,उर्वादत्त पाण्डे, गोपाल दत्त सहित दर्जनों गॉवो के ग्राम प्रधान मौजूद रहे। 

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