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लड़ाई चरम पर:- अपना कार्यालय छोड़ कंजरवेटर कार्यालय पहुंचे वन कर्मी दिन भर वहीं जमे रहे, वन संरक्षक के सामने रखी यह शर्त

डीएफओ व कर्मचारियों का विवाद पहुंचा वन संरक्षक दरबार में

अल्मोड़ा:- अल्मोड़ा में डीएफओ पंकज कुमार व वन कर्मचारियों का विवाद दफ्तर से निकलकर वन संरक्षक दफ्तर तक पहुंच गया, डीएफओ के साथ काम नहीं करने के एलान के साथ वन विभाग के तमाम कर्मचारी सोमवार को अपने कार्यालय नहीं गए| 

प्रभागीय वनाधिकारी व सिविल सोयम के कर्मचारी सुबह 10 बजे घरों से दफ्तर को तो निकले लेकिन वहां ना जाकर सीधे वन संरक्षक कार्यालय पहुंच गए| खुद कार्यालय पहुंचे डीएफओ को भी सारा दिन अकेले कार्यालय में बिताना पड़ा वहां उनका चालक व परिसर चौकीदार ही नजर आया|
सुबह सभी कर्मचारी वन संरक्षक कार्यालय पहुंचकर वहा एकत्र हो गए| वन संरक्षक उत्तरी वृत्त डा. आईपी सिंह के कार्यालय पहुंचते ही सभी उनके पास पहुंच गए| इस दौरान कर्मचारियों ने डीएफओ के व्यवहार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कर्मचारियों को कई बार देर तक कार्यालय रोका जाता है| बात बात पर स्पष्टीकरण लिया जा रहा है एेसी स्थति में वहां कार्य करना संभव नहीं है अब वह यहीं कार्य संपादित करेंगे|

वन संरक्षक आईपी सिंह ने पूर्व में दिए गए ज्ञापन के बिंदुओं की जांच कराने का आश्वासन देते हुए अतिआवश्यक कार्य होने पर ही कार्यालय में देर तक रुकने अन्यथा सुबह 10 से 5 बजे तक की ड्यूटी कर उपस्थिति दर्ज करा घर को जाने की सलाह दी|इसके बाद कर्मचारियों ने वहीं बैठक की और मंगलवार को भी अपने कार्यालय नहीं जाने की बात कही| कर्मचारी नेता महेन्द्र वर्मा, सुरेश जोशी आदि ने डीएफओ पंकज कुमार के व्यवहार पर सवाल उठाए और कहा कि जिस प्रकार का व्यवहार उनका है वह उनके साथ काम नहीं कर सकते हैं| कर्मचारियों ने लोधिया चौकी पर एक करीबी को श्रमिक पद पर नियुक्ति देने का भी आरोप लगाया| यही नहीं कर्मचारियों का उत्पीड़न का आरोप भी मढ़ा|

इधर डीएफओ पंकज कुमार ने कहा कि वह विभागीय कार्य से बाहर गए थे और अल्मोड़ा पहुंचकर ही उन्हें पता चला है कि कर्मचारी वन संरक्षक कार्याल़ पहुंचे हैं, उन्होंने कहा कि सेवा नियमावली में विभागीय हित पर अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है, जंगलात की सुरक्षा या किसी घटना या जरूरी कार्य सामने आने पर रुकना पड़ता है| वह खुद कई बार देर तक कार्यालय रुकते हैं जिस कर्मचारी को लगता है वह अतिरिक्त कार्य कर रहा है वह प्रतिकर ले सकता है इसका प्रावधान है| उन्होंने कहा कि करीबी को नियुक्ति देने का आरोप बेबुनियाद है उनका कोई रिश्तेदार वन विभाग में कार्यरत नहीं है| कहा कि कर्मचारियों की समस्या के समाधान को वह प्रयासरत हैं| कई बार वार्ता का प्रयास कर चुके हैं|

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