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वीएल स्याहीहल के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान, चमोली से आए किसान अल्मोड़ा से ले गए लौह हल

कृषि उपकरणों के लिए पेड़ों के कटान को बचाने के लिए विकसित किया गया है लौह वीएल स्याही हल

अल्मोड़ा:- पहाड़ के कल्पवृक्ष बांज आदि चौडी़ पत्ती प्रजाति पेड़ों को बचाने के उद्देश्य से विकसित वी एल स्याही हल किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
चमोली जिले में चंडी प्रसाद भट्ट द्रारा निशुल्क 500 हलों के वितरण के बाद इसी जिले के एक जागरूक किसान बलबीर सिंह सजवाण, निवासी कुटियाल सैण, दशौली विकासखंड, जिला चमोलीद्वारा वी एल स्याही हल को परीक्षण के लिए मंगाया गया है और परीक्षण में खरा उतरने के बाद अधिक संख्या में हल खरीदने की बात की है।
दरअसल सजवाण शिमली, कर्णप्रयाग में निर्मित लौह हल का प्रयोग करने के बाद मिले कड़वे अनुभव से दुखी थे।लकडी़ के फाल की कीमत 500 तक पहुंचने के बाद उन्होंने लौह हल के इस्तेमाल का निर्णय लिया और स्थानीय स्तर पर बन रहे लौह हल से असंतुष्ट होकर उन्होंने 1715 रुपये खर्च कर वी एल स्याही हल खरीदने का निर्णय लिया। पहली खरीद उन्होंने हल का पूरा मूल्य चुका कर यह हल खरीदा है|
यह हल जी एम ओ यू की बस से चमोली पहुंचेगा।
स्याही देवी विकास समिति शीतलाखेत के संयोजक गिरीश शर्मा, गणेश पाठक, कैलाश नाथ गजेन्द्र कुमार पाठक, हरीश बिष्ट, दिग्विजय सिंह बोरा, रमेश भंडारी, ललित सिंह आदि ने जागरूक किसान सजवाण के प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य किसानों से लकड़ी के हल के स्थान पर लौह हल का प्रयोग कर बांज आदि चौडी़ पत्ती प्रजाति पेड़ों को बचाने की अपील की है।

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