उत्तरा न्यूज
अभी अभी उत्तराखंड कुछ अनकही मुद्दा सिटीजन जर्नलिज़्म

युवाओं के रोल माॅडल है मनीष

स्वरोजगार की मुहिम चलाकर दे रहे सैकड़ों को रोजगार

रामनगर से मयंक मैनाली 

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से रोजगार की तलाश में लोगों का तेजी से होता पलायन एक ज्वलंत मुद्दा रहा है। लोग रोजी-रोटी की तलाश में मैदानी इलाकों और महानगरों का रूख करते हैं|  लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे भी है जो कि अपने क्षेत्र में ही स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं।

ऐसे ही एक शख्स पौड़ी जिले के मनीष सुंदरियाल भी हैं, जो कि स्वरोजगार के माध्यम से रोजगार की तलाश में तेजी से होते पलायन को आईना दिखा रहे हैं | मनीष सुन्दरियाल रामनगर से सटे पौड़ी जिले में नैनीडांडा ब्लॉक के डुंगरी गांव के  रहने वाले हैं। गौरतलब है कि स्वरोजगार करने के जज्बे के चलते वर्षो पूर्व मनीष के पिता विजय सुन्दरियाल ने सरकारी नौकरी छोड़कर स्वरोजगार करने की ठानी। उन्होंने अपने घर पर ही सुन्दरियाल प्रोडक्शंस की स्थापना की, जिसमें फूड प्रोसेसिंग के तहत उसमें अचार, मुरब्बा, जैम-जैली और शरबत बनाने का काम शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कुछ खास सफलता नहीं मिली। लेकिन स्थानीय लोगों को पलायन से रोकने और पर्वतीय उत्पादों को पहचान दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने हार नहीं मानी | पिता विजय के इस जज्बे को पुत्र मनीष का पूरा सहयोग मिला। मनीष ने भी नौकरी का मोह छोड़ कर पिता के जमाए कारोबार को आगे बढ़ाने में जुट गए । बिना किसी सरकारी सहायता के अपने जज्बे और जीवट से की गई मनीष की मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे सुंदरियाल प्रोडक्शन आज पूरे क्षेत्र और उत्तराखंड में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है । आज सुंदरियाल प्रोडक्शन के उत्पाद आसपास के कस्बों के साथ ही रामनगर, कोटद्वार, देहरादून, हल्द्वानी समेत दिल्ली, मुंबई, जैसे बड़े महानगरों तक अपनी पहुंच बना चुके हैं |  मनीष के प्रोडक्शन के उत्पाद बुरांश, माल्टा व लीची का जूस, आंवला शरबत, जैम और अचार आदि उत्पाद कई नामी और बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रहे हैं।

मनीष बताते हैं कि आज उनके पास करीब 500  लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप में उनसे जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। हालांकि उत्पादों की मार्केटिंग से लेकर विपणन तक की व्यवस्था उन्हें खुद करनी पड़ती है। मनीष बताते हैं, कि फूड प्रोसेसिंग के काम के साथ ही उन्होंने बकरी पालन भी किया हुआ है,जिसमें उन्होंने शुरूआती तौर पर 250 से अधिक बकरियों को रखा है | मनीष के रोजगार से जुड़े स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां स्वरोजगार शुरू होने से उन्हें अपने घर के करीब ही रोजगार मिल गया है,अब उन्हें रोजगार के लिए महानगरों की दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है | मनीष का सुंदरियाल प्रोडक्शन उन लोगो के लिए एक सबक है, जो कहते हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ भी रोजगार संभव नहीं है | वहीं सरकार की नीतियां भले ही कागजों में बनती हो, परंतु धरातल पर काम करने वाले मनीष जैसे उद्यमियों तक वह योजनाएं नहीं पहुंच पाती है |

सामाजिक कार्यों में भी रहते हैं सक्रिय

स्वरोजगार की मुहिम चलाने वाले मनीष सामाजिक, राजनीतिक कार्यो में भी बढचढ कर प्रतिभाग करते हैं | जनमुद्दों को लेकर मुखर रहने वाले मनीष बीते दिनों गैरसैंण राजधानी को लेकर चले आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं | इसके अतिरिक्त अपने क्षेत्र में भी वह जनसमस्याओं को लेकर संघर्षशील रहते हैं |

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